हवा चल रही है
टकरा कर मुझसे
चाँद आज आया नहीं,
इस रात को रौशनी से भरने.
तारे काले आकाश में
टिमटिमा रहे हैं,
घोर अंधरे में भी
जगमगा रहे हैं.
मुझको छूती हुई ये हवा
कुछ गुनगुना रही है,
अपने शीतल से स्पर्श से
मुझे सहला रही है.
दूर कहीं...
ख़ामोशी तोड़ते हुए,
कुछ जानवर आवाजें निकाल रहे हैं;
पास में भी कुछ झींगुर.
Bachground म्यूजिक बाज़ रहे हैं.
इस अंधरे में न जाने क्यूँ?
मन शांत रहता है;
अजीब पर एक प्यारे एहसास में,
तारों को गिनता, झूमता है.
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