मैं चल रहा हूं,
मैं क्यों चल रहा हूं?
क्या हूं मैं…
एक मिट्टी का शरीर!
मिट्टी पर चलता हुआ,
मैं चलता हुआ मिट्टी हूं!
मैं सोच रहा हूं,
मैं क्यों सोच रहा हूं?
क्या है ये सोच-समझ...
एक रासायनिक अभिक्रिया!
रसायनों में होती हुई
मेरी सोच-समझ तो एक
रासायनिक उथल-पुथल है!
क्या अंतर है?
मुझमें और धरती में...
कोई नहीं
वो भी मिट्टी, मैं भी मिट्टी!
मैं भी धरती हूं,
मैं ब्रह्मांड हूं
ब्रह्मांड अनंत है,
मैं अनंत हूं.
ब्रह्मांड शून्य है,
मैं हूं ही नहीं!
