Wednesday, 6 November 2019

दिक्कत तो सिर्फ इंसान में है

न दिक्कत धर्म में है,
न दिक्कत विज्ञान में है,
धर्म के नाम पर भी गलत कार्य होते हैं,
विज्ञान पढ़कर भी लोग प्रकृति को तबाह करते हैं।
दिक्कत न तो अल्लाह में है और न भगवान में है,
दिक्कत तो सिर्फ इंसान में है।

Thursday, 19 September 2019

मानव बनाम धरती

इंसानों ने कब्जा कर लिया
धरती को चहुं ओर
पशु-पक्षी हैं भटक रहे
ठिकाना नहीं किसी छोर

जंगल और घास के मैदान
काटा और जलाया
रेगिस्तान, पर्वत-पठार
को भी शहर बनाया

नदी, तालाब और समुद्र
प्रदूषण से गंधाए
पेड़-पौधे और झाड़ियां
विकास की भेंट चढ़ाए

बचे-खुचे जंगल में से जब
कोई भूखा प्राणी बाहर आए
कह नरभक्षी उसको तुम
मौत की सज़ा सुनाए

गाय,भैंस, बकरी, मुर्गी को
लालच में खूब बढ़ाया
बेऔक़ात होकर गौवंश को
खेत-सड़क में छुड़वाया

कहकर आवारा जानवर उनको
चाचाजी तिलमिलाए
और फिर पूरा दोष
सरकार के मत्थे चढ़ाए

नीलगाय, बंदर, सुअर की जमीन
कब्जा करके बोले
ये सब है विनाशक पशु
कोई इनको मारे खा ले

बिना पर्यावास, भोजन, पानी के
प्रजातियों को विलुप्त कराए
जैवतंत्र को असुंतलित करके
जीवन को मिटवाए

प्रदूषण से धरती पर
तापमान गरमाया
जलवायु होने लगी परिवर्तित
जल-भोजन का संकट है आया

धरती पहुंची खतरे में
जलवायु-जैवतंत्र का आपातकाल आया
वैज्ञानिक-कार्यकर्ता रहे चिल्लाते
पर किसी ने लालच नहीं हटाया

जीवन का अब मिटना तय है
यदि मानवता खतरे को समझ न पाई
अब ज्यादा समय नहीं बचा है
अब तो जाग जाओ भाई

Thursday, 17 January 2019

बर्बाद कर दो धरती को

खूब करो इच्छाएं
और बर्बाद कर दो धरती को
जी हां...

पहले इच्छाओं की पूर्ति के लिए रूपए कमाओ
रूपए आते कहां से हैं
अंतत: प्रकृति का दोहन करने वाले उद्यम से ही तो...
तो प्रकृति को लूटकर रूपए कमाओ
और फिर
अपनी इच्छाओं को खरीदो
इच्छाएं भी तो प्रकृति से खिलवाड़ कर के ही तो पूरी होती हैं
आप कोई सामान चाहें, या व्यंजन या मनोरंजन...
तो इस प्रकार आप खूब इच्छाएं करो
अरबों लोग ऐसे ही इच्छाएं करें...
और निगल जाएं पूरी धरती को
जानवरों, जंगल, जमीन समेत .