जीवन के अनमोल 6 वर्ष न्योछावर कर
चेतना की उम्र में जड़ का अध्ययन कर
IT व इलेक्ट्रॉनिक्स का लेकर ज्ञान
अचंभे में हूँ मैं जैसे हूँ अज्ञान
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
विश्व को है सुधार की आवश्यकता
प्रकृति को है उपचार की आवश्यकता
विज्ञान को है विचार की आवश्यकता
मुझको पर नहीं है उस कार्य की आवश्यकता
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
न सीखा मैंने सामाजिक ज्ञान
न जाना मैंने संसार का विधान
कुछ कल-पुर्जों में सिमट गया मैं
अपने जीवन से भटक गया मैं
पता नहीं...
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
विश्व को लड़ते-झगड़ते देखा
पर्यावरण को सड़ते देखा
जीव-जंतुओं को मरते देखा
क्यों नहीं लिया मैंने इसका ज्ञान?
सोचता हूँ...
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
उन वर्षों में शोषण हुआ
कॉलेज में जेल हुई, कुपोषण हुआ
निरर्थक था वो औद्दोगिक ज्ञान
आध्यात्म के नेत्रों से देखा तो
आभास हुआ...
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
पूंजीवादी दुनिया में ज्ञान
स्वरूप बदल कर हो गया बेईमान
सिर्फ सिखाया पैसे कमाना...
छूट गया, मानव ज्ञान का खजाना
विचार किया...
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
चेतना की उम्र में जड़ का अध्ययन कर
IT व इलेक्ट्रॉनिक्स का लेकर ज्ञान
अचंभे में हूँ मैं जैसे हूँ अज्ञान
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
विश्व को है सुधार की आवश्यकता
प्रकृति को है उपचार की आवश्यकता
विज्ञान को है विचार की आवश्यकता
मुझको पर नहीं है उस कार्य की आवश्यकता
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
न सीखा मैंने सामाजिक ज्ञान
न जाना मैंने संसार का विधान
कुछ कल-पुर्जों में सिमट गया मैं
अपने जीवन से भटक गया मैं
पता नहीं...
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
विश्व को लड़ते-झगड़ते देखा
पर्यावरण को सड़ते देखा
जीव-जंतुओं को मरते देखा
क्यों नहीं लिया मैंने इसका ज्ञान?
सोचता हूँ...
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
उन वर्षों में शोषण हुआ
कॉलेज में जेल हुई, कुपोषण हुआ
निरर्थक था वो औद्दोगिक ज्ञान
आध्यात्म के नेत्रों से देखा तो
आभास हुआ...
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!
पूंजीवादी दुनिया में ज्ञान
स्वरूप बदल कर हो गया बेईमान
सिर्फ सिखाया पैसे कमाना...
छूट गया, मानव ज्ञान का खजाना
विचार किया...
न जाने क्यूँ मैंने इंजीनियरिंग की!

अतिउत्तम । बहुत अच्छा व्यक्तित्व है आपका अपने लिए नही समाज के लिए कुछ करने की आपकी इच्छा को सतत नमन।
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