वो कुत्ता
दूसरे छत पर
भौंकता हुआ
न जाने क्यूँ?
दूसरे छत पर
भौंकता हुआ
न जाने क्यूँ?
अंधेरी रात में,
तारों से भरे आकाश के नीचे...
फैला सन्नाटा टूटता हुआ
उस आवाज से
जो मुझसे मेरी शांति छीन रही
ककर्ष आवाज़..........करुण आवाज़
उस कुत्ते की!
तारों से भरे आकाश के नीचे...
फैला सन्नाटा टूटता हुआ
उस आवाज से
जो मुझसे मेरी शांति छीन रही
ककर्ष आवाज़..........करुण आवाज़
उस कुत्ते की!
पहले तो वह आवाज़ चुभी पर...
फिर, उस नादान
जंजीरों में जकड़े
निरीह पशु की करुण वेदना
सी प्रतीत हुई।
फिर, उस नादान
जंजीरों में जकड़े
निरीह पशु की करुण वेदना
सी प्रतीत हुई।
वो पशु...
जिसे जंजीरों में बंधा चौकीदार बना दिया
ठंड-गरम बरसात हर हाल में
खुले आकाश तले
इंसानी चोरों से इंसानी मालिकों की
चौकीदारी करता
न जाने कौनसा एहसान चुका रहा!
जिसे जंजीरों में बंधा चौकीदार बना दिया
ठंड-गरम बरसात हर हाल में
खुले आकाश तले
इंसानी चोरों से इंसानी मालिकों की
चौकीदारी करता
न जाने कौनसा एहसान चुका रहा!
उस काकर्श आवाज़ में,
वो करुण वेदना
मानो....उस पशु के,
मुख से निकालने वाले आँसू हों।
वो अकेला
अजीब सी तन्हाई में
सिर्फ प्रकृति की खामोशी
मानो उसकी दोस्त है।
वो करुण वेदना
मानो....उस पशु के,
मुख से निकालने वाले आँसू हों।
वो अकेला
अजीब सी तन्हाई में
सिर्फ प्रकृति की खामोशी
मानो उसकी दोस्त है।
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