मीठे पानी का वासी है,
नदी-तालाब है इसका ठिकाना;
सरीसृप वर्ग का प्राणी है,
वनस्पति व मृत जीव हैं इसका खाना.
मृत अवशेषों को खाकर ये,
करता है नदी-तालाब की सफ़ाई;
प्रकृति का अनमोल रक्षक है,
उम्र इसने बहुत लंबी है पाई.
सुबह-शाम को क्रियाशील होता,
दिन में ये सेंकता धूप;
पत्थर सा शरीर है इसका,
जो करता इसकी रक्षा खूब.
नदी किनारे गड्ढा खोदकर,
मादा अंडे देकर ढक देती;
दो महीने में वो परिपक्व होते,
फ़िर उनकी ज़िंदगी शुरू होती.
अवैध शिकार ने इन मासूमों के,
अस्तित्व को खतरे में डाल दिया;
नदी-तालाब हैं मरने लगे,
जब कछुओं को नदी से जुदा किया.
बहुत ज़रूरत है इनके संरक्षण की,
यदि नदी-तालाब हमको है बचाना;
इनके शिकार को रोकने के साथ ही,
इनके पर्यावास को भी हानि न पहुंचाना.
नदी-तालाब है इसका ठिकाना;
सरीसृप वर्ग का प्राणी है,
वनस्पति व मृत जीव हैं इसका खाना.
मृत अवशेषों को खाकर ये,
करता है नदी-तालाब की सफ़ाई;
प्रकृति का अनमोल रक्षक है,
उम्र इसने बहुत लंबी है पाई.
सुबह-शाम को क्रियाशील होता,
दिन में ये सेंकता धूप;
पत्थर सा शरीर है इसका,
जो करता इसकी रक्षा खूब.
नदी किनारे गड्ढा खोदकर,
मादा अंडे देकर ढक देती;
दो महीने में वो परिपक्व होते,
फ़िर उनकी ज़िंदगी शुरू होती.
अवैध शिकार ने इन मासूमों के,
अस्तित्व को खतरे में डाल दिया;
नदी-तालाब हैं मरने लगे,
जब कछुओं को नदी से जुदा किया.
बहुत ज़रूरत है इनके संरक्षण की,
यदि नदी-तालाब हमको है बचाना;
इनके शिकार को रोकने के साथ ही,
इनके पर्यावास को भी हानि न पहुंचाना.
Photo Credit : TSA India.

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