इंसानों ने कब्जा कर लिया
धरती को चहुं ओर
पशु-पक्षी हैं भटक रहे
ठिकाना नहीं किसी छोर
जंगल और घास के मैदान
काटा और जलाया
रेगिस्तान, पर्वत-पठार
को भी शहर बनाया
नदी, तालाब और समुद्र
प्रदूषण से गंधाए
पेड़-पौधे और झाड़ियां
विकास की भेंट चढ़ाए
बचे-खुचे जंगल में से जब
कोई भूखा प्राणी बाहर आए
कह नरभक्षी उसको तुम
मौत की सज़ा सुनाए
गाय,भैंस, बकरी, मुर्गी को
लालच में खूब बढ़ाया
बेऔक़ात होकर गौवंश को
खेत-सड़क में छुड़वाया
कहकर आवारा जानवर उनको
चाचाजी तिलमिलाए
और फिर पूरा दोष
सरकार के मत्थे चढ़ाए
नीलगाय, बंदर, सुअर की जमीन
कब्जा करके बोले
ये सब है विनाशक पशु
कोई इनको मारे खा ले
बिना पर्यावास, भोजन, पानी के
प्रजातियों को विलुप्त कराए
जैवतंत्र को असुंतलित करके
जीवन को मिटवाए
प्रदूषण से धरती पर
तापमान गरमाया
जलवायु होने लगी परिवर्तित
जल-भोजन का संकट है आया
धरती पहुंची खतरे में
जलवायु-जैवतंत्र का आपातकाल आया
वैज्ञानिक-कार्यकर्ता रहे चिल्लाते
पर किसी ने लालच नहीं हटाया
जीवन का अब मिटना तय है
यदि मानवता खतरे को समझ न पाई
अब ज्यादा समय नहीं बचा है
अब तो जाग जाओ भाई
धरती को चहुं ओर
पशु-पक्षी हैं भटक रहे
ठिकाना नहीं किसी छोर
जंगल और घास के मैदान
काटा और जलाया
रेगिस्तान, पर्वत-पठार
को भी शहर बनाया
नदी, तालाब और समुद्र
प्रदूषण से गंधाए
पेड़-पौधे और झाड़ियां
विकास की भेंट चढ़ाए
बचे-खुचे जंगल में से जब
कोई भूखा प्राणी बाहर आए
कह नरभक्षी उसको तुम
मौत की सज़ा सुनाए
गाय,भैंस, बकरी, मुर्गी को
लालच में खूब बढ़ाया
बेऔक़ात होकर गौवंश को
खेत-सड़क में छुड़वाया
कहकर आवारा जानवर उनको
चाचाजी तिलमिलाए
और फिर पूरा दोष
सरकार के मत्थे चढ़ाए
नीलगाय, बंदर, सुअर की जमीन
कब्जा करके बोले
ये सब है विनाशक पशु
कोई इनको मारे खा ले
बिना पर्यावास, भोजन, पानी के
प्रजातियों को विलुप्त कराए
जैवतंत्र को असुंतलित करके
जीवन को मिटवाए
प्रदूषण से धरती पर
तापमान गरमाया
जलवायु होने लगी परिवर्तित
जल-भोजन का संकट है आया
धरती पहुंची खतरे में
जलवायु-जैवतंत्र का आपातकाल आया
वैज्ञानिक-कार्यकर्ता रहे चिल्लाते
पर किसी ने लालच नहीं हटाया
जीवन का अब मिटना तय है
यदि मानवता खतरे को समझ न पाई
अब ज्यादा समय नहीं बचा है
अब तो जाग जाओ भाई
Bahut khoob, true
ReplyDelete