खूब करो इच्छाएं
और बर्बाद कर दो धरती को
जी हां...
पहले इच्छाओं की पूर्ति के लिए रूपए कमाओ
रूपए आते कहां से हैं
अंतत: प्रकृति का दोहन करने वाले उद्यम से ही तो...
तो प्रकृति को लूटकर रूपए कमाओ
और फिर
अपनी इच्छाओं को खरीदो
इच्छाएं भी तो प्रकृति से खिलवाड़ कर के ही तो पूरी होती हैं
आप कोई सामान चाहें, या व्यंजन या मनोरंजन...
तो इस प्रकार आप खूब इच्छाएं करो
अरबों लोग ऐसे ही इच्छाएं करें...
और निगल जाएं पूरी धरती को
जानवरों, जंगल, जमीन समेत .
और बर्बाद कर दो धरती को
जी हां...
पहले इच्छाओं की पूर्ति के लिए रूपए कमाओ
रूपए आते कहां से हैं
अंतत: प्रकृति का दोहन करने वाले उद्यम से ही तो...
तो प्रकृति को लूटकर रूपए कमाओ
और फिर
अपनी इच्छाओं को खरीदो
इच्छाएं भी तो प्रकृति से खिलवाड़ कर के ही तो पूरी होती हैं
आप कोई सामान चाहें, या व्यंजन या मनोरंजन...
तो इस प्रकार आप खूब इच्छाएं करो
अरबों लोग ऐसे ही इच्छाएं करें...
और निगल जाएं पूरी धरती को
जानवरों, जंगल, जमीन समेत .

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