जीवन जब दर्द से छलकता है
वक्त जब नासूर बन जाता है
तो लेखन ही काम आता है
अपने दर्द को निकालकर
कागज पर उड़ेलकर
किसी फाइल में बंद करने में!
वक्त जब नासूर बन जाता है
तो लेखन ही काम आता है
अपने दर्द को निकालकर
कागज पर उड़ेलकर
किसी फाइल में बंद करने में!
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