Monday, 15 December 2014

बुद्ध अगर तुम न बन सको तो, लादेन तो न बनो मगर तुम

खून को नस में ही बहने दो,
नाली में ना फेंको तुम;
मांस को शरीर में बसने दो,
आग में ना सेंको तुम.

बच्चों को मां से ना छीनो,
न छीनो मां को बच्चों से;
संग-संग सबको रहने दो,
मत अलग करो इक-दूजे को तुम.

न दर्द उन्हें दो, न ही मारो,
जीवन उनका मत छीनो तुम;
वही खून है, वही दर्द है,
इसको ज़रा महसूस करो तुम.

दु:ख अगर उनका दूर न कर सको,
सुख अगर उनको न दे सको तुम;
रहने दो बस उनको स्वतंत्र,
बिल्कुल भी न छेडो उनको तुम.

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